जब 70 के दशक की बॉलीवूड की बात हो और बिन्दु का नाम न आए, तो बात अधूरी है। वो अभिनेत्री जिसने “मेरा नाम है शबनम” गाने से सबके दिलों पर राज किया और वैंप रोल्स को नई पहचान दी।
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बिन्दु: प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
बिन्दु नानूभाई देसाई का जन्म 17 अप्रैल 1941 को गुजरात के वलसाड जिले में हुआ था। उनके पिता नानूभाई देसाई एक फिल्म प्रोड्यूसर थे और माता ज्योत्सना एक प्रसिद्ध थिएटर अभिनेत्री थीं। बिन्दु आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं।
जब वे केवल 13 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रखा।
बॉलीवूड में शानदार एंट्री
करियर की शुरुआत और हिट फिल्में
| साल | फिल्म | किरदार | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1962 | अनपढ़ | किरण | बॉलीवूड डेब्यू |
| 1969 | इत्तेफाक | रेनू | पहला बड़ा ब्रेक |
| 1969 | दो रास्ते | नीला | फिल्मफेयर नामांकन |
| 1970 | कटी पतंग | शबनम | आइकॉनिक रोल |
| 1972 | दास्तान | माला | तीसरा नामांकन |
| 1973 | अभिमान | चित्रा | बॉक्स ऑफिस हिट |
| 1974 | हवास | कामिनी | बोल्ड किरदार |
“मेरा नाम है शबनम” – एक लीजेंड का जन्म
1970 में आई फिल्म “कटी पतंग” में बिन्दु ने शबनम की भूमिका निभाई। गाना “मेरा नाम है शबनम” ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। यह गाना आज भी लोगों की जुबान पर है और कई बार रीमिक्स भी हो चुका है। इस फिल्म ने बिन्दु को बॉलीवूड की सबसे ग्लैमरस वैंप के रूप में स्थापित कर दिया।
वैंप से वर्सेटाइल एक्ट्रेस तक
बिन्दु को हेलेन और अरुणा ईरानी के साथ बॉलीवूड की ‘आइटम नंबर क्वीन्स’ की पवित्र त्रिमूर्ति का हिस्सा माना जाता है। लेकिन उन्होंने सिर्फ वैंप रोल तक खुद को सीमित नहीं रखा।
प्रमुख फिल्में और किरदार
- कटी पतंग (1970) – शबनम का आइकॉनिक किरदार
- ज़ंजीर (1973) – मोना डार्लिंग के रूप में प्रसिद्ध
- अभिमान (1973) – संवेदनशील भूमिका
- अर्जुन पंडित (1976) – सहानुभूतिपूर्ण किरदार
- मैं हूं ना (2004) – मैच्योर रोल में वापसी
व्यक्तिगत जीवन: प्रेम और समर्पण
बिन्दु ने 15 साल की उम्र में अपने पड़ोसी चम्पकलाल झावेरी से प्यार किया और 18 साल की उम्र में शादी कर ली। दोनों के बीच पांच साल का उम्र का अंतर था और पारिवारिक विरोध भी था, लेकिन उन्होंने अपने प्यार को कायम रखा।
शादी और करियर का संतुलन
उनके पति चम्पकलाल झावेरी ने हमेशा उनकी प्रतिभा का समर्थन किया और उन्हें फिल्मों में काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। ने साबित किया कि शादीशुदा महिलाएं भी बॉलीवूड में सफल हो सकती हैं।
| जीवन के पड़ाव | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 17 अप्रैल 1941, वलसाड, गुजरात |
| शादी की उम्र | 18 वर्ष |
| पति का नाम | चम्पकलाल झावेरी |
| कुल फिल्में | 160 से अधिक |
| करियर अवधि | 1962-2004 (चार दशक) |
| फिल्मफेयर नामांकन | 7 बार |
80s में नया अवतार
80 के दशक में बिन्दु ने हीरो, अलग अलग, बीवी हो तो ऐसी और किशन कन्हैया जैसी फिल्मों में मैच्योर भूमिकाओं के साथ वापसी की। उन्होंने क्रूर सास और आंटी के किरदार निभाए और फिर से खुद को स्थापित किया।

बिन्दु की खासियत
बिन्दु ने चार दशकों के करियर में 160 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी खासियत थी – हर किरदार में अपनी पहचान बना लेना। चाहे वो वैंप हो, डांसर हो, या फिर संवेदनशील किरदार – बिन्दु ने हर रोल में जान डाल दी।
अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा
- ग्लैमरस वैंप – कटी पतंग, ज़ंजीर
- आइटम नंबर्स – हेलेन और अरुणा ईरानी के साथ
- संवेदनशील किरदार – अभिमान, चैताली
- कॉमेडी – बीवी हो तो ऐसी, किशन कन्हैया
- सास की भूमिका – हीरो, मैं हूं ना
प्रेम चोपड़ा के साथ जोड़ी
बिन्दु और प्रेम चोपड़ा की जोड़ी बॉलीवूड में बेहद लोकप्रिय थी। दोनों ने लगन, कटी पतंग, दो रास्ते, छुपा रुस्तम, प्रेम नगर, फंदेबाज़, त्याग, नफरत, गहरी चाल और दास्तान जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया।
2000s में वापसी
बिन्दु ने 2004 में शाहरुख खान की फिल्म “मैं हूं ना” में काम किया। 2007 में उन्होंने “ओम शांति ओम” में भी विशेष भूमिका निभाई। यह उनकी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी थी और दर्शकों ने उन्हें फिर से खूब प्यार दिया।
विरासत और प्रभाव
बिन्दु ने बॉलीवूड में वैंप के किरदार को एक नई परिभाषा दी। उन्होंने साबित किया कि नेगेटिव किरदार भी दर्शकों के दिलों में जगह बना सकते हैं। आज भी जब 70s के बॉलीवूड की बात होती है, तो बिन्दु का नाम सबसे पहले आता है।
निष्कर्ष
बिन्दु की कहानी संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल है। 13 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न सिर्फ बॉलीवूड में अपनी पहचान बनाई, बल्कि शादी और करियर दोनों को सफलतापूर्वक संभाला। बिन्दु आज भी लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपने पूरे करना चाहती हैं।
क्या आपको बिन्दु का “मेरा नाम है शबनम” गाना पसंद है? कमेंट में बताएं!
